मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान: प्रकृति,वन्यजीव और रोमांच की अनोखी दुनिया

अगर भारत में वन्यजीव और प्राकृतिक सुन्दरता की चर्चा की जाए, तो मध्य प्रदेश का नाम सबसे पहले आने वाले राज्यों में से एक हैं| घने जंगल,बाघ,तेंदुए,बारहसिंगा और अनेक दुर्लभ जीव जन्तुओ की वजह से इसे “टाइगर स्टेट” भी कहा जाता हैं| यही कारण हैं की हर साल हजारो पर्यटक और वन्यजीव प्रेमी यहाँ घुमने आते हैं|

आज के समय में सभी पर्यटक अधिकतर अभयारण्यो आदि में घूमना काफी कम पसंद करते हैं, और यह संकेत हैं की आने वाला समय वनों की दृष्टि से काफी दयनीय होने वाला हैं|

म.प्र. के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और उनकी कुछ अलग विशेषताए….

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थान: मंडला और बालाघाट
  • स्थापना: 1955
  • विशेषता: बारहसिंघा सरंक्षण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध|

यहाँ बाघ,तेंदुआ,जंगली कुत्ते और अनेक पक्षी पाए जाते हैं|

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थान: उमरिया
  • स्थापना: 1968
  • विशेषता: भारत में सबसे ज्यादा बाघों के दर्शन होने वाले राष्ट्रीय उधयानों में से एक |
  • यहाँ का प्राचीन बांधवगढ़ किला भी प्रसिद्ध हैं |

पेंच राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थान: सिवनी और छिन्दवाडा
  • विशेषता: रुडयार्ड किपलिंग की ” The jugle book” की प्रेरणा माना जाता हैं |
    • यहाँ बाघ,तेंदुआ और जंगली जीवो की भरमार हैं|

सतपुरा राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थान: नर्मदापुरम
  • विशेषता: यहाँ जीप सफारी के साथ बोट सफारी और वोकिंग सफारी भी होती हैं |
    • यही विशेषताए इसे दुसरे पार्को से अलग बनाती हैं |

मध्य प्रदेश की सरकार की तरफ से कई ऐसी योजनाये चलाई जा रही हैं जिससे प्रदेश में उपस्थित सभी वन्य जीवो को सरंक्षण प्राप्त हो |

मध्य प्रदेश में बाघों की अची संख्या और उनके सरंक्षण के लिए किये गए प्रयासों के कारण इसे “टाइगर स्टेट“कहा जाता हैं| यहाँ के राष्ट्रीय उद्यान न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने मैं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं|मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान केवल घुमने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये हमारी प्राकृतिक धरोहर भी हैं| यदि हम इंक सरंक्षण करेंगे तो आने वाली पिडीयाँ भी इनकी सुन्दरता और वन्यजीवों का आनंद ले सकेगी| चाहे आप विद्यार्थी हो या प्रकृति प्रेमी, इन राष्ट्रीय उद्यानों के बारे में जानकारी होना हमेशा उपयोगी हैं|

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